दिल्ली के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता सत्येंद्र जैन को एंटी करप्शन ब्रांच ने राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के दौरान एसीबी ने सत्येंद्र जैन समेत अन्य आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की। वहीं आरोपी अंकित श्रीवास्तव की दो दिन की पुलिस कस्टडी की मांग भी की गई। कोर्ट ने दोनों अर्जियों पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
अदालत में सत्येंद्र जैन ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि दिल्ली में यमुना की सफाई के लिए मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की क्षमता बढ़ाने का फैसला लिया गया था। उन्होंने कहा कि नए STP बनाने में काफी समय लगता, इसलिए पुराने प्लांट्स को अपग्रेड करने की योजना बनाई गई थी। जैन ने दावा किया कि उनके पास कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी और तकनीकी मामलों में उन्हें अधिकारियों की रिपोर्ट पर भरोसा करना पड़ता था।
जैन के मुताबिक, शुरुआत में 300 MGD क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था और करीब 1546 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को चार पैकेज में टेंडर किया गया। उन्होंने दावा किया कि संबंधित फाइल उनके पास आई ही नहीं। जैन ने अदालत में यह भी कहा कि उनसे ऐसे तकनीकी सवाल पूछे गए, जिनकी जानकारी उनके पास नहीं थी और उन्हें मामले में आरोपी नंबर-1 बनाने की कोशिश की गई।
मामला दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स को अपग्रेड करने के लिए हुई टेंडर प्रक्रिया से जुड़ा है। एसीबी ने आरोप लगाया है कि इस पूरी प्रक्रिया में आपराधिक साजिश, टेंडर की शर्तों में बदलाव और बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं।
सत्येंद्र जैन की ओर से वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए। उन्होंने गिरफ्तारी को कानून के खिलाफ बताते हुए कहा कि जैन को गिरफ्तारी के आधार की जानकारी नहीं दी गई। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि इसी मामले में ईडी पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, लेकिन गिरफ्तारी नहीं की गई थी।
वकील ने कहा कि जैन को पहले भी जांच के लिए बुलाया गया था और उन्होंने जांच में सहयोग किया। उनके मुताबिक, 18 अगस्त को भी जैन पूछताछ के लिए एसीबी कार्यालय पहुंचे थे। बचाव पक्ष ने यह दावा भी किया कि केस दर्ज होने के करीब 27 महीने बाद गिरफ्तारी की गई है।
जैन के वकील ने यह भी तर्क दिया कि जिन टेंडरों को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, वे अक्टूबर 2022 में दिए गए थे। उस समय सत्येंद्र जैन पहले से ही एक अन्य ईडी मामले में गिरफ्तार हो चुके थे। ऐसे में बचाव पक्ष ने सवाल उठाया कि टेंडर प्रक्रिया में उनकी भूमिका कैसे हो सकती है।
वहीं आरोपी नागेंद्र यादव की ओर से वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने भी गिरफ्तारी की जरूरत पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एसीबी को स्पष्ट करना चाहिए कि आरोपियों को गिरफ्तार करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
अब सभी की नजरें राउज एवेन्यू कोर्ट के उस फैसले पर हैं, जिसमें सत्येंद्र जैन और अन्य आरोपियों की न्यायिक हिरासत तथा अंकित श्रीवास्तव की पुलिस कस्टडी की मांग पर निर्णय होना है।
