मुरादाबाद। शहर में रविवार की रात सड़कें तो शांत थीं, लेकिन सियासत शायद करवट ले रही थी। सोमवार की सुबह जब लोगों की नजरें शहर के बीचोंबीच लगे यूनिपोल्स पर पड़ीं तो राजनीतिक गलियारों में अचानक हलचल तेज हो गई। बड़े-बड़े होर्डिंग्स पर सपा मुखिया अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए लिखा था – ‘माफियाराज और अखिलेश, लूट लिया था पूरा प्रदेश।’

होर्डिंग्स पर सिर्फ नारे ही नहीं थे, बल्कि सियासी विवाद को हवा देने वाली तस्वीरों का भी पूरा इंतजाम था। कहीं अखिलेश यादव के साथ आजम खां की तस्वीर नजर आई तो कहीं माफिया अतीक अहमद की बड़ी तस्वीर लगाकर पुराने राजनीतिक दौर को फिर से पोस्टरों पर जिंदा कर दिया गया। कुछ अन्य नेताओं की तस्वीरों ने इस पोस्टर वार को और रंग दे दिया।

सुबह-सुबह शुरू हुआ ‘पोस्टर ऑपरेशन’
पोस्टरों की खबर मिलते ही सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का मौके पर पहुंचना शुरू हो गया। देखते ही देखते सड़क किनारे लगे इन पोस्टरों को फाड़ दिया गया। सपा नेताओं ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए आपत्ति जताई और मामले में पुलिस से शिकायत करने की बात कही।

सपा जिलाध्यक्ष जयवीर यादव ने सीधे भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी स्थिति को लेकर भाजपा परेशान है और इसी वजह से इस तरह की पोस्टरबाजी की जा रही है। उनका कहना है कि स्थानीय भाजपा नेताओं की ओर से यह पोस्टर लगवाए गए हैं।
भाजपा बोली – ‘पोस्टर हमने नहीं लगवाए’
उधर, सपा के आरोपों के बीच भाजपा ने पूरे मामले से दूरी बना ली। भाजपा महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला ने कहा कि उन्हें ऐसे पोस्टरों की कोई जानकारी नहीं है और भाजपा की ओर से इस तरह के पोस्टर नहीं लगवाए गए हैं।
यानी शहर में पोस्टर लगे जरूर, सियासत भी गरम हुई, लेकिन पोस्टर लगवाने वाला फिलहाल ‘गुमनाम प्रायोजक’ ही बना हुआ है।
सपा नेताओं ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की
सपा नेता धर्मेंद्र यादव ने कहा कि मामले में पुलिस को तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की जाएगी। उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि अखिलेश सरकार के कार्यकाल को माफियाराज बताने वालों को अपने शासनकाल में अपराध की स्थिति पर भी नजर डालनी चाहिए।
पोस्टर किसने लगाए? यही बना सबसे बड़ा सवाल
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि रात के अंधेरे में शहर के यूनिपोल्स तक ये पोस्टर पहुंचाने वाले आखिर कौन थे? पोस्टरों पर संदेश साफ था, निशाना साफ था और तस्वीरें भी साफ थीं, लेकिन पोस्टर लगाने वाले चेहरे अभी धुंधले हैं।
सपा इसे भाजपा की राजनीतिक साजिश बता रही है, जबकि भाजपा साफ कह रही है कि उसने ऐसे पोस्टर नहीं लगवाए। ऐसे में मुरादाबाद की सड़कों पर शुरू हुई यह ‘पोस्टर पॉलिटिक्स’ अब शिकायत और जांच तक पहुंचती है या कुछ और सियासी पोस्टरों के साथ इसका अगला एपिसोड सामने आता है, इस पर सबकी नजर है।
फिलहाल इतना जरूर है कि पोस्टर भले ही रात में लगे हों, लेकिन सोमवार की सुबह उन्होंने मुरादाबाद की सियासत को जरूर जगा दिया@शांतनु/INN
