नववर्ष पर साम्प्रदायिक समरसता बनी मिसाल
अमरोहा। अमरोहा जिले के गजरौला क्षेत्र में तथाकथित विकास के नाम पर बड़ी-बड़ी मशीनों से जल-जंगल-जमीन के अंधाधुंध दोहन ने इलाके को व्यापक पर्यावरणीय संकट में धकेल दिया है। लालची और विनाशकारी ढांचागत विकास मॉडल के चलते गजरौला की जलवायु, प्राकृतिक संसाधन और पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंची है। क्षेत्र आज प्रलय जैसे दौर से गुजरता प्रतीत हो रहा है।

सिस्टम की सबसे बड़ी नाकामी: नरेश चौधरी
भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि आज तक ऐसा कोई विकास मॉडल तैयार नहीं हो सका, जो जल-जंगल-जमीन और हवा को नुकसान पहुंचाए बिना ढांचागत प्रगति सुनिश्चित कर सके। यह सिस्टम की सबसे बड़ी नाकामी है। उन्होंने जोर दिया कि सामाजिक समरसता ही किसी भी आंदोलन की असली ताकत है। स्थानीय लोगों ने भी “जियो और जीने दो” के सिद्धांत के तहत प्रकृति के सम्मान और अन्न-जल संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।

अविश्वास और बिखराव से चुनौती बढ़ी: अरुण सिद्धू
प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू ने अपने संबोधन में कहा कि दुर्भाग्यवश इलाके में अविश्वास, सामुदायिक दुराव और क्षेत्रीय बिखराव के कारण साझा उद्देश्य, संपूर्ण एकजुटता और दृढ़ संकल्प हासिल करना पहले से अधिक कठिन हो गया है।
नववर्ष का संकल्प—गांव-गांव जागरूकता
राष्ट्रीय सचिव चंद्रपाल सिंह ने कहा कि नववर्ष पर इससे बड़ा संकल्प कुछ नहीं हो सकता कि इन चुनौतियों से पार पाने के लिए वालंटियर गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करें। ऐसे बड़े मुद्दों पर सामूहिक प्रयास ही समाधान का रास्ता है।

रोजगार की जगह राशन—नीतियों पर सवाल
किसान नेताओं ने कहा कि सरकारों का दायित्व रोजगार देना था, लेकिन वे राशन देकर जिम्मेदारी से बच रही हैं। रोजगार मिलता तो लोग स्वयं राशन खरीद लेते। यही असल आत्मनिर्भरता है।

नौकरशाही सुधार की मांग
प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने कहा कि बात करने वालों की नौकरियां खेत खोदने वालों की मेहनत पर निर्भर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अंग्रेज चले गए, लेकिन शासन पद्धति वही रह गई। भ्रष्टाचार को नौकरशाही ने संस्थागत रूप से मजबूत किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि जनपद मुख्यालय और उससे ऊपर के पदों पर तीन या पांच वर्ष से अधिक स्थायी नियुक्ति न हो, हर अधिकारी का पब्लिक पोर्टल हो जहां जनता रेटिंग दे सके। इससे विकास दोगुना होगा और गजरौला जैसी भूमिगत जल प्रदूषण की समस्याएं सुधरेंगी।

12वें दिन भी जारी धरना, ट्रैक्टर-ट्राली से जुलूस
रासायनिक कारखानों द्वारा भूमिगत जल प्रदूषण के विरोध में भाकियू संयुक्त मोर्चा का धरना-प्रदर्शन नए साल के पहले दिन गुरुवार को 12वें दिन भी जारी रहा। हाथों में झंडे लिए किसान ट्रैक्टर-ट्राली पर सवार होकर जुलूस निकालते हुए शहबाजपुर डोर धरना स्थल पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया।

विशेष: नववर्ष पर समरसता की अनूठी तस्वीर
धरना स्थल नववर्ष पर साम्प्रदायिक समरसता का प्रतीक बन गया। “हर हर महादेव”, “अल्लाहु अकबर” और “बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के नारों की गूंज के बीच धर्मगुरुओं ने जल-जंगल-जमीन को प्रदूषण से मुक्ति, धरने की सफलता और किसानों की खुशहाली के लिए दुआ, अरदास और प्रार्थना की। कुरान ख्वानी, गुरुबाणी पाठ और यज्ञ-हवन के माध्यम से जहरीले भूजल से मुक्ति की कामना की गई—जो वर्तमान दौर के लिए एक मिसाल बनी।

“हमारी जाति किसान है”
राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि किसानों के बीच भाईचारा कायम है—हमारी जाति, धर्म और मजहब किसान है।
उपस्थित गणमान्य
इस अवसर पर विभिन्न समुदायों के धर्मगुरुओं के साथ प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू, राष्ट्रीय सचिव चंद्रपाल सिंह, ओम प्रकाश, प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान, सुशील चौधरी, नूर चौधरी, अभिषेक भुल्लर, सरदार जगपाल सिंह, समीर चौधरी, लक्की चौधरी, शान चौधरी, आज़म खान, आसिफ खान, आरिफ खान, सुरेंद्र चौधरी, हैदर चौधरी, शौकीन चौधरी, हरज्ञान सिंह, अब्दुल रशीद, दिलशाद चौधरी, अमरजीत राय, मलखान सिंह, मोईन अली सहित अनेक किसान नेता मौजूद रहे।
