अमरोहा। कथित विकास की भारी कीमत चुका रहे गजरौला क्षेत्र के ग्रामीणों का रासायनिक कारखानों से फैल रहे प्रदूषण के खिलाफ संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। जल, जंगल और जमीन को बचाने तथा प्रदूषण से मुक्ति की मांग को लेकर शहबाजपुर डोर गांव में चल रहा किसान आंदोलन शुक्रवार को 13वें दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी है। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद आंदोलनकारी किसान अपने संकल्प पर डटे हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी और मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप की मांग
आंदोलनकारी ग्रामीणों ने देश के सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) और मानवाधिकार आयोग से गजरौला क्षेत्र के ज़हरीले हो चुके भूजल और प्रदूषित पर्यावरण का स्वतः संज्ञान लेते हुए तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि रासायनिक उद्योगों के कारण क्षेत्र की आबोहवा, पानी और मिट्टी बुरी तरह दूषित हो चुकी है, जिससे जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

13 दिनों से जारी आंदोलन ने ग्रामीणों में जगाई नई उम्मीद
पिछले 12 दिनों से लगातार चल रही इस मुहिम ने ग्रामीण समुदाय के भीतर नई ऊर्जा, साहस और उम्मीद पैदा की है। ग्रामीणों को विश्वास है कि गजरौला की हवा में ज़हर घोलने वाले रासायनिक कारखानों को लेकर अब बहस केवल औपचारिकता नहीं रहेगी, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ आगे बढ़ेगी।
भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी का भव्य स्वागत
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर नेशनल हाईवे-09 स्थित शहबाजपुर डोर गांव में चल रहे धरना-प्रदर्शन को और धार देने के उद्देश्य से शुक्रवार को संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी सहित राष्ट्रीय कार्यकारिणी गजरौला के समीपवर्ती गांव महेसरा पहुंची।
यहां ग्रामीणों ने भाकियू नेताओं का नायकों की तरह जोरदार स्वागत किया। फूल-मालाओं से लादकर नेताओं का अभिनंदन किया गया।

प्रदूषण पीड़ित किसानों ने रखी अपनी पीड़ा
इस अवसर पर प्रदूषण से प्रभावित गांवों के किसानों ने भाकियू नेतृत्व को अपनी समस्याओं से अवगत कराया और रासायनिक कारखानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई। किसानों ने कहा कि जहरीले रसायनों के कारण जल स्रोत दूषित हो चुके हैं और गंभीर बीमारियां बढ़ती जा रही हैं।
नरेश चौधरी का बड़ा बयान: कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है संयुक्त मोर्चा
किसान नेता नरेश चौधरी ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि भाकियू संयुक्त मोर्चा पूरी ताकत के साथ उनके संघर्ष में शामिल है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल किसानों की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है।
उन्होंने स्थानीय समुदाय की एकजुटता, सक्रिय भागीदारी और व्यापक जनचेतना की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रशासन को भी सख्त रुख अपनाने की नसीहत दी।

भूजल और मृदा रिपोर्ट सार्वजनिक न होना प्रशासन पर सवाल
नरेश चौधरी ने कहा कि यह बेहद हैरान करने वाली बात है कि बसैली गांव के भूजल और मिट्टी के नमूने लिए जाने के बावजूद रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यह अधिकारियों की अक्षमता है या फिर जानबूझकर की गई अनदेखी।
उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग तभी जागते हैं जब कोई बड़ा नुकसान हो चुका होता है, जो बेहद चिंताजनक है।
सरकार की नीति पर उठे सवाल
भाकियू अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से प्रदूषण को लेकर कोई ठोस और प्रभावी योजना ज़मीन पर नजर नहीं आ रही है। केवल कागजी कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है।

सरकार ईमानदारी से लागू करे प्रदूषण मानक: अरुण सिद्धू
प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू ने कहा कि यदि सरकार निष्पक्षता के साथ सभी पक्षों की बात सुनते हुए ईमानदारी से प्रदूषण नियंत्रण मानकों को लागू करे, तो आज का यह संघर्ष कल के विश्वास में बदल सकता है।
उन्होंने चेताया कि यदि प्रक्रिया फिर से केवल फाइलों तक सीमित रही, तो गजरौला की धरती, हवा और पानी को एक बार फिर तथाकथित विकास की कीमत चुकानी पड़ेगी। इस दौरान आंदोलन को और तेज करने का भी ऐलान किया गया।
लंबे समय से प्रदूषण की मार झेल रहा है गजरौला
गौरतलब है कि गजरौला क्षेत्र लंबे समय से रासायनिक उद्योगों से फैल रहे प्रदूषण का शिकार रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कारखानों से निकलने वाला जहरीला रासायनिक कचरा पर्यावरण को बुरी तरह नष्ट कर रहा है, जिससे भूजल दूषित हो चुका है और स्वास्थ्य समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
गैस रिसाव और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा
प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने कहा कि गजरौला में गैस रिसाव की घटनाएं आम हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने बताया कि नेशनल हाईवे-09 और स्टेट हाईवे-51 पर प्रदूषण से धुंध और धुएं के कारण दुर्घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे जान-माल का नुकसान हो रहा है।

एसओपी लागू करने की पुरानी मांग दोहराई
आंदोलनकारी किसानों ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को सख्ती से लागू करने की पुरानी मांग को दोहराया और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।
युवा किसान नेता प्रशांत यादव बने यूथ मोर्चा ब्लॉक अध्यक्ष
इस मौके पर संगठनात्मक विस्तार करते हुए युवा किसान नेता प्रशांत यादव को भाकियू यूथ मोर्चा का ब्लॉक अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
जनचेतना यात्रा के दौरान 20 सदस्यीय ग्राम कार्यकारिणी का भी गठन किया गया।
कई वरिष्ठ किसान नेता रहे मौजूद
कार्यक्रम में किरण पाल सिंह, ओम प्रकाश सिंह, अमरजीत सिंह, रामकृष्ण चौहान, तेजपाल सिंह, जगपाल सिंह, रॉबिन यादव, दीपांशु यादव, विनय यादव, विशाल वर्मा, गोलू यादव, कपिल यादव, त्रिलोक यादव सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
