गुरुवार सुबह ED की कई टीमों ने एक साथ कोलकाता के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। इस कार्रवाई का मुख्य केंद्र साल्ट लेक स्थित I-PAC (Indian Political Action Committee) का कार्यालय और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन का लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास रहा। I-PAC वही संस्था है जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चुनावी रणनीति तैयार करती है। The Economic Times के अनुसार, यह छापेमारी दिल्ली में दर्ज एक पुराने कोयला तस्करी मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में की गई है।
मुख्यमंत्री का मौके पर पहुंचना और हस्तक्षेप
जैसे ही छापेमारी की खबर फैली, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए सीधे उस स्थान पर जाने का फैसला किया जहां कार्रवाई चल रही थी। वे कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा के साथ प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं। किसी मुख्यमंत्री का इस तरह ED की रेड वाली जगह पर खुद पहुंचना एक दुर्लभ घटना मानी जा रही है। वहां पहुंचकर उन्होंने ED अधिकारियों से बात की और उनके काम करने के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई।
‘राजनीतिक प्रतिशोध’ और ‘डराने’ का आरोप
छापेमारी वाली जगह के बाहर मीडिया को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से “राजनीतिक प्रतिशोध” से प्रेरित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चूंकि तीन महीने बाद बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग करके विपक्षी दलों को “जान-बूझकर परेशान” कर रही है और डर का माहौल बनाना चाहती है।
पार्टी दस्तावेजों की जब्ती पर आपत्ति
ममता बनर्जी ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ED की टीम I-PAC के दफ्तर से तृणमूल कांग्रेस के गोपनीय दस्तावेज और चुनावी उम्मीदवारों के डेटा जब्त कर रही है। उनका दावा है कि इन दस्तावेजों का कोयला घोटाले की जांच से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार इन फाइलों के जरिए चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप करार दिया।
