अमरोहा। गजरौला क्षेत्र में रासायनिक कारखानों से फैल रहा जल और वायु प्रदूषण अब स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकट का रूप ले चुका है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में किसान जत्थेबंदियों का धरना शहबाजपुर डोर गांव में 19वें दिन भी जारी रहा। कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और गिरते तापमान के बावजूद किसान अपनी मांगों पर अडिग हैं, जबकि प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में है।
भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने दो टूक कहा कि अब जिम्मेदारों को विकास और विनाश के बीच फर्क करना ही होगा। उन्होंने गजरौला में वर्षों से जारी भूजल और वायु प्रदूषण को राजनीतिक मिलीभगत का परिणाम बताते हुए आरोप लगाया कि रासायनिक कारखानों ने स्थापना के समय सरकार से किए गए अनुबंधों और पर्यावरणीय कानूनों का खुला उल्लंघन किया है। यह मानव जीवन के खिलाफ गंभीर अपराध है।
भूजल त्रासदी अब राष्ट्रीय संकट
चौधरी ने चेतावनी दी कि जिस तरह देश के अन्य हिस्सों में जल संकट भयावह रूप ले चुका है, उसी तरह गजरौला का भूजल प्रदूषण भी राष्ट्रीय जल आपदा बन चुका है। राजनीतिक संरक्षण के चलते यह संकट लगातार गहराता जा रहा है और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है।
ठंड में धरना, लेकिन आवाज़ बुलंद
गुरुवार को अमरोहा में न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जबकि दिन का अधिकतम तापमान 18 डिग्री के आसपास रहा। ठंडी हवाओं और कोहरे के बीच किसान अलाव जलाकर धरने पर बैठे रहे। किसानों का कहना है कि ठंड से लड़ सकते हैं, लेकिन ज़हरीली हवा और प्रदूषित पानी से होने वाली मौतें कहीं ज्यादा खतरनाक हैं।

हवा ज़हर बनी, सांस लेना चुनौती
धरने को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू ने कहा कि गजरौला की जल-जंगल-जमीन से लगातार छेड़छाड़ कर क्षेत्र को आपदा की ओर धकेला जा रहा है। विशेषज्ञों के हवाले से उन्होंने बताया कि हवा में मौजूद सिलिका कणों और रासायनिक प्रदूषण के कारण अस्थमा, फेफड़ों और हृदय रोगों में तेजी से वृद्धि हो रही है। सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। चेतावनी दी कि यदि प्रदूषण नहीं रुका तो सांस लेना भी संघर्ष बन जाएगा।
नीतियां उद्योगपतियों के लिए, किसान उपेक्षित
भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने आरोप लगाया कि सरकारी नीतियां बड़े औद्योगिक घरानों के हित में बन रही हैं, जबकि किसानों और आम जनता की सेहत को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कंपोजिट वाटर मैनेजमेंट इंडेक्स का हवाला देते हुए कहा कि दूषित पानी के कारण देश में हर साल लाखों लोगों की जान जा रही है।
महिलाओं–बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी
धरने में गिरेंद्र सिंह, चौधरी चरण सिंह, नूर अहमद, मुमताज अहमद, विकास सिंह, कौशल शर्मा, एहसान अली, दानिश, तालिब चौधरी, आसिफ चौधरी, साइना आलम, रघुवीर सिंह, होमपाल सिंह, मलखान सिंह, गीता, सोनी, बबीता सैनी, उर्मिला, रानी, सरिता कुमार सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे। महिलाओं और बुजुर्गों की बड़ी संख्या ने आंदोलन को और मजबूती दी।
किसानों की चेतावनी
किसान नेताओं ने कहा कि गजरौला प्रदूषण का मुद्दा संसद में उठाने वाले तत्कालीन सांसद हरीश नागपाल को आज भी क्षेत्रवासी याद करते हैं। किसानों ने साफ शब्दों में चेताया-
“हम ठंड में ठिठुर रहे हैं, लेकिन प्रदूषण से मौत की ठंड ज्यादा खतरनाक है। जब तक कारखानों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा।”
