दिखावटी राजनीति बनाम असली इंसानियत का इम्तिहान
महीने भर से जारी बेमियादी धरना
गजरौला। नाईपुरा क्षेत्र में दूषित और जहरीले पानी की समस्या को लेकर पिछले एक महीने से जारी भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) का बेमियादी धरना अब केवल आंदोलन नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति और समाज के नैतिक पतन का आईना बन चुका है। किसानों का कहना है कि यहां नल खोलते ही केमिकल युक्त जहरीला पानी निकलता है, जिससे न केवल फसलें बर्बाद हो रही हैं, बल्कि लोगों का स्वास्थ्य भी गंभीर खतरे में है।

धरना स्थल पर पहुंचे भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू ने इस जल संकट को “दिखावटी राजनीति और असली इंसानियत के बीच की निर्णायक लड़ाई” करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया—
“धर्म के नाम पर लोग सड़कों पर उतर आते हैं, लेकिन जब जिंदगी से जुड़े स्वच्छ पानी की बात आती है, तो सबको अंधापन क्यों छा जाता है?”
उनका यह बयान सीधे उस राजनीतिक पाखंड पर चोट करता है, जहां भावनाओं और धर्म के नाम पर सत्ता हासिल की जाती है, लेकिन किसानों की बुनियादी जरूरतों—स्वच्छ पानी, स्वास्थ्य और पर्यावरण—पर चुप्पी साध ली जाती है।

राष्ट्रीय सचिव चंद्रपाल सिंह ने इसे “मानव धर्म की असली परीक्षा” बताते हुए कहा कि ‘जल ही जीवन है’ का नारा देने वालों की खामोशी सबसे बड़ा अपराध है। वहीं प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि धर्म की रक्षा के नाम पर सड़कें भर जाती हैं, लेकिन जल-जंगल-जमीन और जनस्वास्थ्य जैसे वास्तविक मुद्दों पर वही लोग मौन हो जाते हैं।
उन्होंने सवाल किया—“क्या सत्ता और चुनाव के आगे इंसानी जान की कोई कीमत नहीं?”
प्रदेशाध्यक्ष एहसान अली ने नाईपुरा और बगद नदी के प्रदूषण को पूरे समाज के लिए चेतावनी बताया। उनका कहना था कि यह केवल किसानों की समस्या नहीं, बल्कि आने वाले समय में पूरे क्षेत्र को घेर लेने वाली मानवीय आपदा है। फैक्ट्रियों से निकलने वाला प्रदूषित पानी भूमिगत जल को जहर बना रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।

किसानों का साफ कहना है कि असली धर्म वही है जो इंसान की जान बचाए और पानी को शुद्ध करे। यदि अब भी सत्ता और प्रशासन नहीं जागा, तो यह जल त्रासदी अमरोहा तक सीमित नहीं रहेगी। यह आंदोलन केवल पानी की शुद्धता की लड़ाई नहीं, बल्कि उस राजनीतिक ढोंग के खिलाफ संघर्ष है, जो भावनाओं का इस्तेमाल कर सत्ता तो हासिल करता है, लेकिन जनता को भूल जाता है।

रविवार को धरने में वयोवृद्ध किसान नेता चौधरी चरण सिंह, सुरेंद्र सिंह प्रधान, सुरजीत सिंह, एससी-एसटी मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष रिंकू सागर, शाने आलम, अमरजीत देओल, इरशाद गुर्जर, अनवर अली, शेफाली, हनीफ गुजर, गंगा राम नाईपुरा, सुरेश चंद्र, ओम प्रकाश, रामप्रसाद, मुबारक चौधरी, मोहम्मद उमर सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
