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अमरोहा। भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि लापरवाह सिस्टम को जागृत करने, सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ाने और खतरनाक रासायनिक कारखानों की सख्त निगरानी कराने में सहयोग के बजाय स्थानीय राजनेता मूक-बधिर बने हुए हैं। जबकि “खामोशी अपराध है, इसलिए सवाल पूछना जरूरी है।”

विकास के नाम पर पर्यावरण और मानव जीवन को दांव पर लगाने की प्रवृत्ति अब अमरोहा जिले के गजरौला क्षेत्र में नाईपुरा गांव की नाजुक पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने रासायनिक कारखानों से हो रहे भूजल प्रदूषण के खिलाफ आंदोलनरत किसानों की पीड़ा को लेकर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि विकास की इस अंधी दौड़ में कुदरत को भूलना खतरनाक है।

नरेश चौधरी ने कहा कि गजरौला इलाका कभी जैव विविधता का खजाना रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में रासायनिक कारखानों को पर्यावरण-अनुकूल बताने वाले दावों ने स्थानीय निवासियों के जीवन को अनदेखा कर गंभीर लापरवाही बरती है। क्षेत्र अब जलग्रहण के भारी दबाव में आ गया है, जिसका सीधा असर बगद नदी पर पड़ रहा है, जो धीरे-धीरे मृत नदी बनती जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों के समर्थन और नौकरशाहों की मिलीभगत से जलस्रोतों की नैसर्गिकता समाप्त हो चली है, जबकि स्थानीय किसानों और ग्रामीणों की आपत्तियों को कभी गंभीरता से नहीं लिया गया।
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में बेमियादी धरने का आज़ 33वां दिन है। धरने पर पहुंचे राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि लापरवाह सिस्टम को जागृत करने, सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ाने और खतरनाक रासायनिक कारखानों की सख्त निगरानी के बजाय स्थानीय राजनेता मूक-बधिर बने हुए हैं। जबकि “खामोशी अपराध है, इसलिए सवाल पूछना जरूरी है।”

प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने स्थानीय किसानों की पीड़ा को अपने लफ़्ज़ों में बयां करते हुए कहा कि राजनेताओं की चुप्पी से हम सब इतने आहत हो चुके हैं कि अब वे किसी राजनीतिक दल के बजाय नौकरशाहों को वोट देना ज्यादा पसंद करेंगे, निर्वाचित होने के बाद भी राजनेता उन्हीं के लिए काम करते हैं।

धरने पर पीड़ित गांववासियों ने बताया कि दूषित भूजल से बीमारियां फैल रही हैं, कृषि आधारित आजीविका तबाह हो रही है और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से लोग न्याय से वंचित हैं। अल्पसंख्यक मोर्चा प्रदेश प्रभारी व मंडल अध्यक्ष अहसान अली ने मांग की कि पीड़ितों को एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों से मुफ्त चिकित्सा सुविधा, सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना, संपदा की अपूर्णीय क्षति की भरपाई, दूषित स्रोतों का उपयोग रोकना, पानी की नियमित जांच-शुद्धिकरण और लंबी अवधि का वाटर सिक्योरिटी प्लान तत्काल लागू किया जाए।
यह आंदोलन अब रासायनिक उत्सर्जन विरोधी लहर के रूप में तेज हो रहा है, जहां किसान विकास और पर्यावरण संतुलन की मांग कर रहे हैं।
इस अवसर पर वयोवृद्ध किसान नेता चौधरी चरणसिंह, विजय सिंह गंगाराम, सोमपाल सिंह, सुरेश चंद्र, समरपाल सैनी, ओम प्रकाश सिंह, रामप्रसाद, ओमपाल सिंह होमपाल सिंह आदि किसान मौजूद रहे।
