अमरोहा।अमरोहा जिले के गजरौला क्षेत्र स्थित नाईपुरा गांव में रासायनिक कारखानों से फैल रहे जहरीले प्रदूषण के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले किसानों का बेमियादी धरना मंगलवार को भी जारी रहा। मूसलाधार बारिश के बावजूद यह विरोध प्रदर्शन अपने 38वें दिन में प्रवेश कर गया, जो अब पर्यावरण न्याय, जनस्वास्थ्य और राजनीतिक जवाबदेही की एक मजबूत आवाज बन चुका है।
शहबाजपुर डोर स्थित दिल्ली–लखनऊ नेशनल हाईवे-9 के किनारे चल रहे इस धरने में किसानों और ग्रामीणों ने भूजल प्रदूषण से हो रही फसलों की तबाही, गंभीर बीमारियों (दमा, कैंसर जैसी घातक समस्याएं) और पीने के साफ पानी के संकट को लेकर रोष जताया।
‘विश्वगुरु’ के दावों पर तंज, ज़मीनी हकीकत पर सवाल
भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव दलजीत सिंह ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश को ‘विश्वगुरु’ और बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन नाईपुरा जैसे इलाकों में प्रति व्यक्ति आय बेहद कम है। दूसरी ओर प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों और उनके संरक्षकों की कमाई लाखों में है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जल, जंगल और जमीन का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है, जबकि स्थानीय जनता को बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं।
दलजीत सिंह ने यह भी कहा कि स्थानीय सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं। उनका आरोप है कि कारखाना मालिकों, नौकरशाहों और नेताओं की मिलीभगत ने किसानों की आवाज दबा दी है और प्रशासन कारपोरेट कर्मचारियों की तरह व्यवहार कर रहा है।

नेता धरना स्थल से कतरा रहे, किसान केवल वोट बैंक बनकर रह गए
अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने कहा कि नेता और अधिकारी धरना स्थल पर पहुंचने से शर्म और डर के कारण कतराते हैं, जबकि चुनाव के समय किसान ही उनके लिए वोट और दरी बिछाने का काम करते हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब नेताओं और अधिकारियों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और इलाज की सुविधाएं मिलती हैं, तो नाईपुरा के बच्चों को साफ पानी और स्वस्थ जीवन का अधिकार क्यों नहीं?
एहसान अली ने किसानों के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को याद दिलाते हुए कहा कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी किसान समुदाय को संविधान में दिए गए वादों के अनुरूप न्याय नहीं मिल सका। ‘शाइनिंग इंडिया’ की चकाचौंध में नाईपुरा जैसे गांवों की असली तस्वीर छुपा दी जाती है, जबकि यहां के लोग सिर्फ स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण की मांग कर रहे हैं।
45–50 गांव प्रदूषण की चपेट में, जांच पर मिलीभगत का आरोप
किसान नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि अब यह आंदोलन ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ के निर्णायक मोड़ पर है और हर हाल में नाईपुरा के साथ खड़ा होना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदूषण की सैंपलिंग और जांच प्रक्रिया में मिलीभगत हो रही है, जबकि 45 से 50 गांव इस जहरीले प्रदूषण से गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
धरने में बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद
धरने में शानू चौधरी, इशरत चौधरी, चन्दपाल सिंह, हरबिंदर सिंह, मोहित चौधरी, वसीम सैफी, मयंक गुप्ता, अब्दुल रशीद, ओम प्रकाश, दिलशाद चौधरी, शौकीन चौधरी, जलुद्दीन, रघुवीर सिंह, होमपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।
