“शंकराचार्य के सामने प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री भी नतमस्तक हों”- राजेंद्र नाथ त्रिपाठी का सरकार पर तीखा प्रहार
मुरादाबाद। कांठ रोड स्थित एक बैंकट हॉल में आयोजित कार्यक्रम उस समय पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंग गया, जब ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र नाथ त्रिपाठी के पहुंचते ही मंच से केंद्र और प्रदेश सरकार पर तीखे हमले शुरू हो गए। उन्होंने शंकराचार्य प्रकरण, संविधान, कानून व्यवस्था, जातिवाद और ब्राह्मण समाज के अधिकारों को लेकर कई बड़े और संवेदनशील मुद्दों पर बेबाक बयान दिए।

अपने संबोधन में राजेंद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि जिसे भगवान का दर्जा दिया गया हो, उससे बड़ा कोई नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यदि आज शंकराचार्य मंच पर उपस्थित हों, तो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी न्यायाधीश हो—सबको उनके सामने विनम्र होकर बैठना चाहिए। शंकराचार्य को मनाने के लिए किसी भी प्रतिनिधि के न भेजे जाने को उन्होंने देश का दुर्भाग्य बताया।
संविधान और कानूनों को लेकर सरकार पर सीधा आरोप
ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को निरस्त कर नया कानून लाने की क्या आवश्यकता थी। उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान की मूल भावना को कमजोर कर समाज में जहर घोला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज हालात यह हैं कि कोई झूठा आरोप लगते ही व्यक्ति को जेल भेज दिया जाता है और संविधान में नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार तक नहीं छोड़ा गया। इन फैसलों के लिए उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराया।

ब्राह्मण महाकुंभ और अनुमति को लेकर उठाए सवाल
मीडिया से बातचीत में राजेंद्र नाथ त्रिपाठी ने बताया कि ब्राह्मण महाकुंभ के आयोजन को लेकर वे दिल्ली तक यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज़ादी की लड़ाई हमेशा संघर्ष से भरी रही है और यदि अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ा, तो ब्राह्मण समाज पीछे नहीं हटेगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश-प्रदेश में अन्य वर्गों को अपने कार्यक्रमों की अनुमति मिल रही है, तो ब्राह्मण समाज को क्यों रोका जा रहा है।
उन्होंने कहा, “हम भी इस देश के नागरिक हैं, वोटर हैं। हम कोई आतंक फैलाने नहीं जा रहे, सामाजिक कार्य करते हैं। अगर हमें अनुमति नहीं दी जाती, तो यह ब्राह्मण समाज पर अत्याचार है।”

जातिवाद और दलित एक्ट पर भी साधा निशाना
राजेंद्र नाथ त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग समाज को जातियों में बांटने का काम कर रहे हैं। उन्होंने दलित एक्ट को काला कानून बताते हुए कहा कि जब यह कानून पास हो रहा था, तब यही लोग तालियां बजा रहे थे। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे नेताओं को आने वाले चुनावों में जनता करारा जवाब देगी।
शंकराचार्य प्रकरण पर भावुक टिप्पणी
शंकराचार्य प्रकरण को लेकर उन्होंने कहा कि पिछले 15–16 दिनों से मां गंगा की गोद में बैठकर न्याय मांगा जा रहा है, लेकिन कोई मनाने तक नहीं पहुंचा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को स्वयं जाकर हाथ जोड़कर शंकराचार्य से मिलना चाहिए था और गंगा स्नान कराना चाहिए था—इसमें भी सरकार की ही नैतिक जीत होती।
अंत में उन्होंने कहा कि बड़े शंकराचार्य हों या छोटे संत—दोनों के प्रभाव को समझना जरूरी है, क्योंकि ऐसे मुद्दे अंततः समाज को किस दिशा में ले जाते हैं, यह सबके सामने है।
