अमरोहा/मुरादाबाद। केंद्र सरकार से जाट समुदाय को आरक्षण देने की मांग को लेकर वर्ष 2011 में अमरोहा के काफूरपुर रेलवे स्टेशन पर हुए बहुचर्चित रेल रोको आंदोलन मामले में अदालत ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया है। इस फैसले के साथ ही करीब डेढ़ दशक पुराना यह मामला न्यायिक रूप से समाप्त हो गया।
अदालत से बरी होने वालों में नौगावां सादात विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक चौधरी समरपाल सिंह, उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व डिप्टी एसपी उमेद सिंह सहित जाट समाज के कई प्रमुख नेता शामिल हैं। कोर्ट के इस निर्णय को आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि 5 मार्च 2011 को जाट आरक्षण की मांग को लेकर जाट समुदाय ने काफूरपुर रेलवे स्टेशन पर अनिश्चितकालीन रेल रोको आंदोलन शुरू किया था। आंदोलन का नेतृत्व उस समय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक कर रहे थे। इस दौरान हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी रेलवे ट्रैक पर बैठ गए थे और रेल संचालन पूरी तरह ठप हो गया था।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदर्शनकारियों ने अपनी गाय-भैंसें तक रेलवे ट्रैक पर ला दी थीं और वहीं अस्थायी तौर पर रसोई बनाकर भोजन तैयार किया जा रहा था। इसके चलते न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि देशभर में रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ था।
उस समय प्रदेश में बसपा सरकार थी। प्रशासन ने हालात को भांपते हुए शुरू में कोई कठोर कार्रवाई नहीं की, लेकिन लगातार 15 दिनों तक ट्रैक जाम रहने से उत्पन्न अव्यवस्था के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। न्यायालय के आदेश पर 19 मार्च 2011 को प्रशासन ने ट्रैक खाली कराया।
हाईकोर्ट के निर्देश पर तत्कालीन जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक सहित करीब 1500 लोगों के खिलाफ रेलवे एक्ट और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी मामले में चौधरी समरपाल सिंह का नाम भी शामिल था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद मुरादाबाद के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट – प्रथम मनेंद्र पाल सिंह की अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।
