लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सोमवार को राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा बार-बार इस संवेदनशील विषय को उठाने पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिसके चलते सदन की कार्यवाही दिनभर बार-बार बाधित होती रही और अंततः मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाते ही शुरू हुआ हंगामा
कार्यवाही की शुरुआत के साथ ही राहुल गांधी ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा उठाया। उनके बयान पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने तीखी आपत्ति जताई और सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। बढ़ते हंगामे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही स्थगित कर दी।
दोपहर 3 बजे फिर शुरू हुई कार्यवाही, फिर वही विवाद
दोपहर करीब तीन बजे लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। हालांकि, सदन शुरू होते ही राहुल गांधी ने फिर से वही मुद्दा उठाना शुरू कर दिया, जिस पर सत्ता पक्ष ने एक बार फिर कड़ा विरोध जताया। हालात काबू से बाहर होते देख स्पीकर को दूसरी बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
पूर्व सैन्य प्रमुख नरवणे की किताब का जिक्र बना टकराव की वजह
इसके बाद तीसरी बार जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो राहुल गांधी ने पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब का हवाला देते हुए अपनी बात रखनी चाही। इसे लेकर सत्ता पक्ष ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील विषय बताते हुए सदन में चर्चा का विरोध किया। नतीजतन, फिर से भारी हंगामा हुआ और कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
18 घंटे की चर्चा, लेकिन पहले ही दिन बाधा
गौरतलब है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए लोकसभा में कुल 18 घंटे का समय आवंटित किया गया है। लेकिन चर्चा के शुरुआती दिन ही बार-बार हंगामे और स्थगन के चलते सदन का कामकाज सुचारु रूप से नहीं चल पाया।
सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने
सत्ता पक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी बार-बार ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं, जिनसे सदन की कार्यवाही बाधित हो रही है और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर राजनीति की जा रही है। वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार अहम मुद्दों पर चर्चा से बच रही है और विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।
आने वाले दिन भी हंगामेदार रहने के आसार
जिस तरह से पहले ही दिन संसद में तीखा टकराव देखने को मिला है, उससे साफ है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान आगे भी संसद का माहौल गरम रह सकता है।
