अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई 2 फरवरी 2026 की वार्ता के बाद अमेरिका ने भारतीय सामानों पर ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को 25% से घटाकर 18% कर दिया है, जिसे भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत रूसी तेल की खरीद पर लगाया गया 25% का दंडात्मक शुल्क भी पूरी तरह हटा दिया गया है, जो अमेरिका-भारत के व्यापारिक संबंधों में एक नया ‘स्वर्ण युग’ शुरू करता है।
1.टैरिफ में भारी कटौती
अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को 25% से घटाकर 18% कर दिया है। इसके अतिरिक्त, रूसी तेल खरीदने के कारण जो 25% का दंडात्मक शुल्क (Punitive Levy) लगा था, उसे भी हटा दिया गया है। इसका मतलब है कि कई उत्पादों पर प्रभावी शुल्क 50% से घटकर अब 18% रह जाएगा।
2. $500 बिलियन की ‘बाय अमेरिकन’ प्रतिबद्धता
भारत ने अगले 5 वर्षों में अमेरिका से $500 बिलियन से अधिक मूल्य के उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें शामिल प्रमुख क्षेत्र हैं:
- ऊर्जा और कोयला: अमेरिका से अधिक कच्चा तेल और कुकिंग कोल का आयात।
- प्रौद्योगिकी: डेटा सेंटर, विमान (Planes) और अन्य हाई-टेक उपकरण।
- कृषि: अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार को और अधिक खोलना।
3. रूसी तेल और भू-राजनीति
राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद करेगा और इसकी भरपाई अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से तेल आयात करके करेगा। ट्रंप का मानना है कि इस कदम से रूस की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ेगा और यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने में मदद मिलेगी।
4. किन उद्योगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
टैरिफ कम होने से अमेरिका को निर्यात करने वाली भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी:
- कपड़ा और परिधान (Textiles): अमेरिका भारतीय कपड़ों का सबसे बड़ा बाजार है, जहाँ अब मार्जिन में सुधार होगा।
- ऑटो पार्ट्स: इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी।
- समुद्री उत्पाद (Seafood): विशेष रूप से झींगा (Shrimp) निर्यातकों के लिए यह एक वरदान साबित होगा।
- फार्मास्युटिकल्स: जेनेरिक दवाओं के निर्यात में भारत की पकड़ और मजबूत होगी।
5. भारत की ओर से रियायतें
ट्रंप ने दावा किया है कि भारत अपने यहाँ अमेरिकी उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को ‘शून्य’ (ZERO) करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। हालांकि, भारतीय पक्ष ने अभी तक ‘शून्य टैरिफ’ के दावे पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन व्यापारिक बाधाओं को कम करने पर सहमति जताई है।
यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के ठीक बाद आया है, जो वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती शक्ति को दर्शाता है।
