अमरोहा। रासायनिक कारखानों से दूषित जल की वजह से किसान हर माह सैकड़ों रुपये दवाइयों, एयर प्यूरीफायर, मास्क, नेबुलाइजर और ऑक्सीजन किट पर खर्च कर रहे हैं। जिले के गजरौला क्षेत्र में रासायनिक कारखानों से निकलने वाले जहरीले अपशिष्ट के कारण भूजल गंभीर रूप से दूषित हो गया है। नाईपुरा गांव समेत आसपास के इलाकों में किसानों को सांस की बीमारियां, एलर्जी, कैंसर जैसी घातक बीमारियां और फसलों की बर्बादी का सामना करना पड़ रहा है।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले शहबाजपुर डोर पर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को 66वें दिन में प्रवेश कर गया। किसान नेताओं ने बताया कि प्रदूषण ने सामान्य जीवन को बेहद महंगा और कठिन बना दिया है।

नाईपुरा के किसान हर माह सैकड़ों रुपये दवाइयों, एयर प्यूरीफायर, मास्क, नेबुलाइजर और ऑक्सीजन किट पर खर्च कर रहे हैं, क्योंकि हवा और पानी अब जहर बन चुके हैं।

किसानों का कहना है कि कथित विकास का परिणाम है जो मूलभूत संसाधन जैसे शुद्ध हवा और पानी भी बाजार में बिकने लगे हैं। परिवारों में अस्थमा, फेफड़ों की संक्रमण, पीलिया और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ गई हैं। सीमित साधनों वाले परिवारों के लिए चिकित्सा और सुरक्षित संसाधनों पर खर्च बोझ बन गया है।

किसान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन पर कार्रवाई न करने का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि फैक्ट्रियों से अपशिष्ट का उचित निपटान हो, भूजल की सफाई हो और प्रभावितों को मुआवजा मिले। धरना तब तक जारी रहेगा, जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते।

इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी, मीडिया प्रभारी जयकरण सैनी, अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली, ओमप्रकाश सैनी, होमपाल सिंह, ओमप्रकाश सिंह, आज़म चौधरी, शमशाद चौधरी, बाबू अली, शमसुद्दीन चौधरी, असद अली, गंगाराम समेत प्रभावित गांवों के तमाम किसान मौजूद रहे।
