मुरादाबाद। शहर में निर्माण स्थल पर मजदूरों के साथ कथित मारपीट के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के एक जूनियर इंजीनियर (जेई) पर लाठी से हमला कर मजदूरों को गंभीर रूप से घायल करने के आरोप हैं, लेकिन घटना के 18 दिन बाद भी पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज न किए जाने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच के आदेश, लेकिन कार्रवाई ठप
मामले में मंडलायुक्त आन्जनेय सिंह ने जांच के निर्देश दिए थे। सिटी मजिस्ट्रेट और क्षेत्राधिकारी (सीओ) ने मौके पर पहुंचकर चश्मदीदों के बयान भी दर्ज किए। इसके बावजूद केस में कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है।
स्थानीय स्तर पर आरोप लग रहे हैं कि जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बजाय मामला लंबित रखा जा रहा है।

वीडियो और मेडिकल रिपोर्ट के बाद भी मुकदमा नहीं
घटना से जुड़े वीडियो सामने आने और घायलों की मेडिकल रिपोर्ट में कई फ्रैक्चर की पुष्टि होने के बावजूद पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करना सवालों के घेरे में है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ घायलों को हाथ-पैर में गंभीर चोटें आईं और एक मजदूर को सर्जरी तक करानी पड़ी। चश्मदीदों के बयान भी दर्ज हो चुके हैं, फिर भी कानूनी कार्रवाई की शुरुआत नहीं हुई है।

घटना कैसे हुई
बताया जा रहा है कि 27 फरवरी की शाम दिल्ली रोड स्थित एक निर्माणाधीन स्थल पर विवाद हुआ। आरोप है कि जेई मौके पर पहुंचे और कथित तौर पर मजदूरों व ठेकेदार के साथ मारपीट की।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना या चेतावनी के सीधे लाठीचार्ज किया गया, जिससे कई लोग घायल हो गए।
निर्माण विवाद और दबाव के आरोप
मामला कथित रूप से अवैध निर्माण से जुड़ा बताया जा रहा है। ठेकेदार का आरोप है कि यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध था, तो नियमानुसार नोटिस, सीलिंग या अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती थी।

इसके बजाय सीधे बल प्रयोग किया गया, जो प्रक्रिया के विपरीत है। साथ ही, पूर्व में कथित रूप से आर्थिक मांग किए जाने के भी आरोप सामने आए हैं, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पीड़ितों की स्थिति गंभीर
घायल मजदूर अभी भी इलाज करा रहे हैं। कुछ के हाथ-पैर में फ्रैक्चर हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर भी असर पड़ा है।
पीड़ितों का कहना है कि वे दैनिक मजदूरी पर काम करने वाले लोग हैं और निर्माण की वैधता-अवैधता से उनका सीधा संबंध नहीं होता।

प्रशासन पर पक्षपात के आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि आरोपी अधिकारी को बचाने की कोशिश हो रही है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मामले में पारदर्शिता और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग तेज होती जा रही है।
