मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव में 3 फरवरी 2026 को निलंबित किए गए सांसदों का निलंबन रद्द करने का अनुरोध किया गया था। सदन ने सर्वसम्मति से इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया, जिसके बाद सभी 8 सांसद तुरंत प्रभाव से सदन की कार्यवाही में भाग लेने के लिए पात्र हो गए।
AI तस्वीरों और पोस्टरों पर सख्त निर्देश
निलंबन वापस लेते समय स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों के व्यवहार को लेकर कड़े नियम स्पष्ट किए। उन्होंने कहा कि सदन के भीतर तख्तियां (Placards), पोस्टर और बैनर दिखाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। विशेष रूप से, उन्होंने एआई (Artificial Intelligence) से बनाई गई भ्रामक तस्वीरों को सदन में प्रदर्शित करने पर रोक लगा दी। उनका मानना है कि ऐसी तकनीक का गलत इस्तेमाल सदन की गरिमा और तथ्यों की सत्यता को प्रभावित कर सकता है।
संसदीय मर्यादा और अनुशासन
स्पीकर ने सांसदों को नसीहत दी कि लोकतंत्र के इस मंदिर में चर्चा और संवाद होना चाहिए, न कि शोर-शराबा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में कोई सदस्य वेल (Well) में आकर तख्तियां दिखाता है या अपमानजनक चित्रों का उपयोग करता है, तो उनके खिलाफ फिर से कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय विपक्षी नेताओं के साथ हुई एक समन्वय बैठक के बाद लिया गया, जिसमें विपक्ष ने सदन चलाने में सहयोग का आश्वासन दिया था।
निलंबित और बहाल हुए सांसदों की सूची
बहाल किए गए सांसदों में मुख्य रूप से कांग्रेस के सदस्य शामिल हैं:
- कांग्रेस: गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, बी. मणिकम टैगोर, प्रशांत यादवराव पाडोले और चमाला किरण कुमार रेड्डी।
- माकपा (CPI-M): एस. वेंकटेशन।
