मुरादाबाद। काकोरी कांड के अमर क्रांतिकारियों की प्रतिमाएं तोड़े जाने के विरोध में जनपद में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को काकोरी-एक्शन शताब्दी वर्ष आयोजन समिति से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि 23 मार्च की तड़के लगभग तीन बजे शाहजहांपुर के टाउन हॉल परिसर में नगर निगम द्वारा वर्ष 1972 से स्थापित शहीद रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह की प्रतिमाओं को बुलडोजर से हटाया गया। यह कार्रवाई कथित तौर पर सौंदर्यीकरण और सड़क चौड़ीकरण के तहत की गई।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रतिमाओं को हटाने का तरीका बेहद असम्मानजनक और संवेदनहीन था। उन्होंने इस कार्रवाई के समय को लेकर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि जिस दिन यह घटना हुई, उसी दिन देशभर में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का शहादत दिवस मनाया जा रहा था, ऐसे में इस प्रकार की कार्रवाई अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
ज्ञापन में समिति ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की विरासत के प्रति लापरवाही बरती जा रही है, जिससे आम लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना था कि यदि सौंदर्यीकरण आवश्यक था, तो प्रतिमाओं को सम्मानपूर्वक हटाकर किसी सुरक्षित स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाना चाहिए था।
समिति ने प्रशासन के समक्ष दो प्रमुख मांगें रखीं—पहली, शहीदों की प्रतिमाओं को उसी स्थल पर पूरे सम्मान के साथ दोबारा स्थापित किया जाए। दूसरी, इस प्रकरण में शामिल नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इस घटना को लेकर शहर में व्यापक नाराजगी देखी जा रही है और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी इसकी कड़ी निंदा की है।
